पर्यावरण के प्रति सजग प्रयास

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हवाई अड्डों और एयरलाइंस पर समान रूप से बढ़ते पर्यावरणीय दबाव के फलस्वरूप, दुनिया भर के हवाई अड्डों द्वारा पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं और पर्यावरण के अनुकूल नीतियों और रणनीतियों को तेज़ी से अपनाया जा रहा है। पर्यावरण के प्रति सजग एवं संवेदनषील सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम होने के नाते भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (भा.वि.प्रा.), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत अपने हवाई अड्डों पर समावेषी और सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में भा.वि.प्रा. ने कार्बन उत्सर्जन, ध्वनि प्रदूषण एवं प्लास्टिक पर प्रतिबंध आदि को कम करने की दिषा मे अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश की जनता से आग्रह किया था कि वे प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें। इसकी विधिवत शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर 2019) से एकसाथ पूरे देश में की जाएगी। श्री मोदी के आह्वान तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेश के बाद भा.वि.प्रा. ने तुरंत प्रभाव से अपने 55 हवाई अड्डों पर प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया है। श्री मोदी ने अपने भाषण में आग्रह किया कि भारत में 2022 तक सिंगल यूज़ प्लास्टिक पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सभी नागरिकों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं का दायित्व है कि प्लास्टिक कचरे को एकत्रित करके इसके निस्तारण की उचित व्यवस्था करे।

ठोस कचरा प्रबंधन
हवाई अड्डों पर की जाने वाली विभिन्न गतिविधियां काफ़ी मात्रा में कचरे का उत्पादन करती हैं। इस कारण, विषेष रूप से भारत में हवाई अड्डों पर यात्री संख्या में बहुत वृद्धि के कारण और उत्पन्न होने वाले कचरे के परिणामस्वरूप इसके प्रबंधन का मुद्दा बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है। हवाई अड्डा कचरा प्रबंधन प्रणाली में आमतौर पर विभिन्न प्रकार के अपषिष्ट स्रोतों, सुविधाओं, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की पहचान षामिल होती है, जो विभिन्न प्रकार के कचरे से निपटने के लिए आवष्यक होती हैं। भा.वि.प्रा. ने उत्पादित कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण उपाय किए हैं। लागू अपषिष्ट प्रबंधन विनियामक फ्रेम कार्य के अनुसार स्थाई अपषिष्ट प्रबंधन ;ैॅडद्ध नीति और प्रणाली को लागू किया है अपषिष्ट प्रबंधन को बिल्ड, ऑपरेट और रखरखाव और अंत में कचरे का निपटान पर आधारित किया है। इसके अंतर्गत कचरे के संग्रह, पृथककरण, परिवहन, जैविक और गैर-जैविक कचरे का यंत्रीकृत उपचार और अंत में कचरे का निपटान है।

“पीएम मोदी ने कहा है कि 2022 तक देश में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगे”

एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध
निगमित सामाजिक दायित्व के प्रति कटिबद्धता को रेखांकित करते हुए, भा.वि.प्रा. ने चरण-1 में अगरतला, अहमदाबाद, अमृतसर, बागडोगरा, भोपाल, भुवनेष्वर, कालीकट, चंडीगढ़, चेन्नई, कोयम्बटूर, देहरादून, गोवा, गुवाहाटी, इम्फाल, इंदौर, जयपुर, जम्मू, कोलकाता, लखनऊ, मदुरै, मेंगलोर, पटना, पोर्ट ब्लेयर, पुणे, रायपुर, रांची, श्रीनगर, तिरुचिरापल्ली, तिरुपति, त्रिवेंद्रम, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा एवं विशाखापट्टनम 35 हवाई अड्डों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त घोषित कर दिया गया है। वहीं दूसरे चरण में 20 हवाई अड्डों को एकल-उपयोग प्लास्टिक मुक्त किया गया है। कुल मिलाकर 55 हवाई अड्डों को 2019 तक एकल-उपयोग प्लास्टिक मुक्त टर्मिनल घोषित किया जा चुका है। इन कदमों में एकल उपयोग की प्लास्टिक वस्तुओं जैसे स्ट्रॉ, प्लास्टिक कटलरी, प्लास्टिक प्लेट आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह क्वालिटी काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा किए गए थर्ड-पार्टी आकलन के आधार पर है। वहीं तीसरे चरण में भा.वि.प्रा. के 20 अन्य हवाई अड्डों को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया जाएगा।

भा.वि.प्रा. पर्यावरण के प्रति जागरूक है

पर्यावरण के अनुरूप विकास
किसी व्यक्ति, संगठन या वस्तु के कार्बन पदचिह्न का मूल्यांकन कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के आधार पर किया जा सकता है। दूसरे षब्दों में, कार्बन पदचिह्न कार्बन डाईऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की कुल मात्रा है जो किसी भी उत्पाद या सेवा के जीवन चक्र में उत्सर्जित होते हैं। वैष्विक नागरिक उड्डयन में कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 4-5 प्रतिषत हिस्सा है और ये उत्सर्जन बढ़ रहा है। इस मुद्दे से निपटने के लिए भा.वि.प्रा. ने हवाई अड्डों को कार्बन तटस्थ सतत स्थिर (कार्बन न्यूट्रल सस्टेन) बनाने के उद्देष्य से अपने चार हवाई अड्डों, जैसे कि कोलकाता, भुवनेष्वर, त्रिवेंद्रम और वाराणसी हवाई अड्डों पर एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेषनल-एयरपोर्ट कार्बन प्रत्यायन ;।ब्प्.।ब्।द्ध कार्यक्रम भी षुरू किया है। इन सभी हवाई अड्डों ने निर्धारित आवष्यकता को पूरा किया और ।ब्प्.।ब्। प्रोग्राम के लेवल-1-मैपिंग में प्रवेष कर लिया है। अगले चरण के रूप में अब भा.वि.प्रा. इन हवाई अड्डों पर ग्रीनहाउस गैस ;ळभ्ळद्ध उत्सर्जन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

कोलकाता हवाई अड्डे पर गत्ते के कप व लकड़ी के चम्मचों का उपयोग

ध्वनि प्रदूषणरहित हवाई अड्डे
उड़ानों की संख्या में वृद्धि के साथ, हवाई अड्डों पर ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जो हवाई अड्डों का उपयोग करने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। मानव स्वास्थ्य पर महत्त्वपूर्ण हानिकारक प्रभाव के प्रति संवेदनषील होने के नाते, भा.वि.प्रा. लगातार ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय करता है। इसका उद्देष्य महत्त्वपूर्ण जानकारियों के समय पर प्रवाह को प्रभावित किए बिना यात्रियों के लिए ‘षांत, तनावमुक्त माहौल’ बनाना है। भा.वि.प्रा.GRIHA (Green Rating for Integrated Habitat Assessment)मानदंडों के अनुरूप प्रभावी षोर प्रबंधन कार्यक्रमों को लागू कर रहा है। ध्वनि प्रबंधन को प्रमुख हवाई अड्डों जिन पर सालाना 1.5 मिलियन या अधिक यात्रियों का आवागमन होता है पर लागू किया गया है। कुछ अत्यावष्यक घोषणाएं जैसे कि उड़ानों मे देरी/रद्द करने की घोषणा, गेट चेंज के संबंध में घोषणा, यात्रियों के लिए मैनुअल पेजिंग, पासपोर्ट के गुम जाने के बारे में घोषणा, सामान्य सुरक्षा जागरूकता घोषणाएं, आपातकालीन स्थितियों में घोषणाएं इसकी परिधि से परे हैं।भा.वि.प्रा. ने प्लास्टिक बैगांे पर रोक लगा दी है

“भा.वि.प्रा. के 55 हवाई अड्डों को कारगर उपाय अपनाकर एकल-उपयोग प्लास्टिक मुक्त टर्मिनल घोषित किया जा चुका है”

हवाई अड्डों पर प्लास्टिक की बोतलें क्रश करने वाली कई मशीनें लगाई गई हैं

इन प्रयासों को सुनिष्चित करने के लिए भा.वि.प्रा. ने स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन के महत्त्व को समझा है और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अपने 35 चयनित हवाई अड्डों पर गुणवत्ता का मूल्यांकन करने का दायित्व भारतीय गुणवत्ता परिषद ;फब्प्द्ध को सौंपा है जोकि सरकार के तत्वावधान में एक स्वायत्त निकाय है। इस दिषा में भा.वि.प्रा. स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ इको-सिस्टम सुनिष्चित करने वाले अपने हवाई अड्डों को यात्री फुटफॉल के आधार पर तीन श्रेणियों में “स्वच्छ और सुरक्षित हवाई अड्डे पुरस्कार“ प्रदान करता है। इन प्रयासों द्वारा आज भा.वि.प्रा. स्वच्छ एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भारत की परिकल्पना को साकार कर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

 

 

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